मुग़ल काल में अकबर के शासन में कृषि भूमि को कितने वर्गों में विभाजित किया गया था?

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मुग़ल काल में अकबर के शासनकाल के दौरान प्रमुख भूमि सुधारों के अनुसार, कृषि भूमि को चार प्रकारों में विभाजित किया गया था, जो हैं पोलज,परौती, चाचर, और बंजर. पोलज सबसे उपजाऊ भूमि थी जिस पर हर मौसम में खेती की जाती थी और उसे कभी परती नहीं छोड़ा जाता था। परुती पोलज की तुलना में कम उपजाऊ थी, इसलिए मिट्टी की उर्वरता बहाल करने के लिए इसे एक या दो साल के लिए परती छोड़ दिया जाता था।

चाचर भूमि, कम उर्वरता के कारण, मिट्टी की उर्वरता बहाल करने के लिए तीन से चार साल तक परती छोड़ दी जाती थी, जबकि बंजर, सबसे कम उपजाऊ भूमि, मिट्टी की उर्वरता बहाल करने के लिए 5 साल या उससे अधिक के लिए परती छोड़ दी जाती थी। बंजार भूमि में खेती न्यूनतम अथवा बिल्कुल न होने के कारण कोई कर वसूल नहीं किया जाता था। इससे उस अवधि के दौरान किसानों को टिकाऊ कृषि करने और लंबी अवधि तक मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिली।

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About Aditya Abhishek

An agricultural graduate from SDSUV, Uttarakhand, Aditya Abhishek created Agriculture Review to bridge the gap between agricultural science and practical application. He is dedicated to providing students and nature enthusiasts with high-quality, actionable insights into farming, crop protection, and home gardening.

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