एग्रीकल्चर रिव्यू
आदित्य अभिषेक द्वारा
भारत में किसान फरवरी से मई तक फसल काटने के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक गेहूं के बीज बोना शुरू कर सकते हैं।
लेकिन अपने खेत में बुआई के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, रोग प्रतिरोधी, उपचारित बीजों का ही उपयोग करें। बुआई के लिए ढीले या क्षतिग्रस्त बीजों का उपयोग न करें क्योंकि इससे उपज खराब हो सकती है।
जलोढ़ उपजाऊ मिट्टी की उपस्थिति के कारण भारत में सिन्धु-गंगा के मैदान गेहूं के सबसे आदर्श उत्पादक क्षेत्रों में से एक हैं।
यदि मिट्टी में दीमक लग गई है तो बीज को 4 मिलीलीटर डर्स्बन/रूबन/डरमेट 20 ईसी से उपचारित करें। उपचार के 30 दिन के अन्दर बीज बोयें।
अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 35 से 40 किलोग्राम गेहूं का बीज बोना चाहिए। सभी सिकुड़े हुए और छोटे बीज निकाल दें।
किसान सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल की मदद से पंक्तियों के बीच 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी पर 4-6 सेंटीमीटर की गहराई पर गेहूं के बीज बो सकते हैं।
बीज बोने के तुरंत बाद खेत की सिंचाई करें। यह बीजों के अंकुरण के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ प्रदान करने में मदद करेगा।
यदि आप गेहूं की किस्म और रोपण विधियों पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहते हैं, तो हमसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और वेबसाइट पर संपर्क करें।
पढ़ने के लिए धन्यवाद!