एग्रीकल्चर रिव्यू

2050 तक फसल जल की कमी 4.6k टीएमसीएफटी तक पहुंचने का अनुमान है

आदित्य अभिषेक द्वारा

तमिलनाडु

तमिलनाडु की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 13% है। अतः राज्य में सतत् फसल उत्पादन के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना अति आवश्यक है। 

तमिलनाडु

राज्य योजना आयोग ने 'सतत भूमि उपयोग नीति' पर एक मसौदा रिपोर्ट तैयार की है जिसमें कहा गया है कि 2050 तक पानी की कमी 4,646 टीएमसीएफटी तक पहुंच सकती है।

नतीजे

यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह राज्य में फसल की गतिशीलता को बदल सकता है और आगामी वर्षों में फसल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। 

चिंतजनक

इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि राज्य में जल प्रदूषण अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्टों के जल निकायों में रिसाव के कारण हो रहा है, जिससे भूजल प्रदूषण हो रहा है। 

प्रति व्यक्ति उपलब्धता

प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता का राष्ट्रीय औसत सालाना 1,486 क्यूबिक मीटर है, लेकिन तमिलनाडु में प्रति व्यक्ति सालाना केवल 900 क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता है।  

कुल जल मांग

कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए हर साल 1,867.85 टीएमसीएफटी पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन उपलब्धता केवल 1,681.78 टीएमसीएफटी है। यह भविष्य के लिए चिंताजनक है। 

समाधान

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे ड्रिप जैसी पानी का उपयोग करने वाली कुशल सिंचाई प्रणाली अपनाएं, गैर-मौसमी जुताई का अभ्यास करें और ऐसी फसलें उगाएं जो शुष्क क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त हों। 

आपके विचार

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